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Sanskrit Verb Lookupसंस्कृत धातु कोश

A reader's window into a curated dhātupāṭha: 2,064 roots, their paradigms, meanings, and grammar.

एक संगृहीत धातुपाठ पाठक के झरोखे से: २,०६४ धातु, उनके रूप, अर्थ और व्याकरण।

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Visarga & nasals (hard to type on mobile):विसर्ग, अनुस्वार एवं अनुनासिक के लिये प्रयोग करें
Insert (hard to type on mobile):ऋ आदि और उनकी मात्रा के लिये प्रयोग करें

Aboutपरिचय

Classical Sanskrit reading slows to a crawl whenever you hit an unfamiliar verb form. A single root can take more than a hundred shapes across tenses, persons, voices, and derivations. Existing tools are either heavy academic references or one-trick search boxes.

संस्कृत वाङ्मय या पत्रिका पढते समय अक्सर हम अपरिचित घातुरूप से (क्रियापद के रूप) टकराते है। वर्तमान भविष्य आदि कई कालवाचक रूप और धातुसाधित शब्द धातुओं से बनते है। प्रयुक्त घातुरूप शब्द किस धातु से संबन्धित है और उसे अर्थसहित जानके लिये धातुकोष, धातुरूपावली, कृदन्त रूपावली आदि कई ग्रन्थों का सहारा लेना पडता है।

This site is a reader's window into a dataset hand-built over several years: 2,064 dhātus with their lakāra forms, kṛdantas, karmaṇi, ṇijanta, sannanta, and yaṅanta cells, plus meanings in Sanskrit, English, and Hindi. The data is ~75% filled and grows with every revision.

इसे पाठक के दृष्टी में सरलता से जानने के लिये यह वेब साइट एक झरोखे के रूप में मदद करेगी। २०६४ धातुओं के अर्थ और गण पद आदि विशेषताएँ तथा सीमित लकार रूप और करीब करीब सारे कृदन्त रूप लेकर बना यह संग्रह एक अत्यन्त कारगर और प्रयोग के लिये आसान वेब ऐप के जरिये पाठक को उपलब्ध किया गया है। धातुपाठ संग्रह ७५ प्रतिशत से अधिक पूर्ण है तथा यह हर नयी आवृत्ति के साथ अधिक परिपूर्ण होगा।

Type a root in Devanāgarī or IAST, paste an inflected form you don't recognise, or search by English meaning. The matcher handles partial prefixes, anusvāra variants (ं ↔ म्), and surfaces every cell where your query appears.

किसी शब्द को शोधस्थान में देवनागरी या IAST में लिखने से या चिपकाने से (paste) हम धातु सूचि, धातुओं की विस्तृत संरचित जानकारी और उनके रूप तक पहुँच सकते है। प्रयोग विधि के अंतर्गत इसका अधिक विवरण पाया जायेगा।

This is not a translator. It makes you work through the text — helping you read and understand a passage yourself, and learn Sanskrit in the process.

यह कोई अनुवादक नहीं है। यह आपको पाठ के भीतर से काम करवाता है — पाठ को स्वयं पढ़ने और समझने में सहायता करता है, और इस प्रक्रिया में आपको संस्कृत सीखने में मदद करता है।

Contactसंपर्क

Spotted a missing cell, a wrong gloss, or want to contribute to the dataset? Reach the curator directly:

rphadke849@gmail.com

Feedback shapes what gets built next.
Please include the dhātu (root), the cell or form in question, and what you'd expect to see.

Glossaryशब्दावली

Every abbreviation and term that labels a column or badge inside a verb's paradigm, with the curator's own Hindi definitions. The terms below appear across the lookup — gaṇa/pada markers, the ten lakāras, the voices, the derived stems, and each kṛdanta suffix.

Verb attributesधातु विशेषताएँ

गण gaṇa
धातु गण (१ से १० तक)।
पद pada
आत्मनेपद, परस्मैपद या उभयपद।
सक saka
सकर्मक धातु (transitive)।
अक aka
अकर्मक धातु (intransitive)।
द्विक dvika
द्विकर्मक धातु (ditransitive)।
सेट् · अनिट् · वेट् seṭ · aniṭ · veṭ
धातुओं की विशिष्टता (इडागम लेने/न लेने/विकल्प से लेने का स्वभाव)। सार्वधातुक / अर्धधातुक अर्थ या काल धातु रूपों के लिये सेट् अनिट् वेट् जानना जरूरी है।

Lakāras — tenses & moodsलकार

लकार कालवाचक (tense) होते हैं; कुल १० लकार हैं।

लट् laṭ
वर्तमान काल (तिबादि)।
लङ् laṅ
अनद्यतन भूतकाल (दिबादि, प्रथम भूतकाल)।
लिट् liṭ
परोक्ष भूतकाल (णबादि, द्वितीय भूतकाल)।
लृट् lṛṭ
सामान्य भविष्यत् काल (स्यत्यादि, द्वितीय भविष्य काल)।
लोट् loṭ
आज्ञा / विनन्ति अर्थ में काल (तुबादि)।
विधिलिङ् vidhi-liṅ
करना योग्य है या करना चाहिये अर्थ में काल (यादादि)।
आशीर्लिङ् āśīr-liṅ
आशीर्वाद अर्थ में काल (क्यादादि)।
लुङ् luṅ
सामान्य भूतकाल (द्यादि, तृतीय भूतकाल)।
लृङ् lṛṅ
हेतु भाव (संकेतार्थ) में काल (स्यदादि)।
लुट् luṭ
अनद्यतन भविष्यत् काल (तावादि, प्रथम भविष्यकाल)।

सार्वधातुक अर्थ या काल — वर्तमान (लट्), प्रथम भूत (लङ्), लोट् और विधिलिङ्।
अर्धधातुक अर्थ या काल — द्वितीय भूत (लिट्), तृतीय भूत (लुङ्), प्रथम भविष्यत् (लुट्), द्वितीय भविष्यत् (लृट्), संकेतार्थ (लृङ्) और आशीर्लिङ्।

Voice & derived stemsप्रयोग एवं साधित धातु

कर्तरि kartari
कर्ता प्रधान वाक्य या धातु रूप (active voice)।
कर्मणि karmaṇi
कर्म प्रधान वाक्य या धातु रूप (passive voice)।
प्र पु ए व pra·pu·e·va
प्रथम पुरुष एक वचन धातु रूप।
पुं/स्त्री/नपुं प्रथमा ए व kṛdanta form
पुं/स्त्री/नपुं प्रथमा एक वचन कृदन्त रूप। (धातु रूप में पुरुष व वचन होते हैं पर लिंग नहीं; कृदन्त रूप में लिंग व वचन होते हैं पर पुरुष नहीं। कृदन्त क्रियाद्योतक रूप में प्रथमा में, और विशेषण रूप में विशेष्य के अनुसार किसी भी विभक्ति में प्रयुक्त होता है।)
णिजन्त (णिच्) ṇijanta
प्रेरक धातु या कृदन्त रूप (करवाना अर्थ में, causative)।
सन्नन्त sannanta
क्रिया की इच्छा के अर्थ में धातु या कृदन्त रूप (desiderative)।
यङन्त · यङ्लुगन्त yaṅanta · yaṅluganta
बार बार या जोर देकर अर्थ में धातु या कृदन्त रूप (intensive / frequentative)।

Kṛdanta suffixesकृदन्त प्रत्यय

कृदन्त — धातुसाधित रूप (participles)। नीचे प्रत्येक प्रत्यय का अर्थ; कोष्ठक में दिये गये लिंग व विभक्ति का संकेत है।

शतृ śatṛ
क्रिया करते हुए / होते हुए अर्थ में वर्तमान कालिक कृदन्त रूप (परस्मैपदी धातुओं में कर्तरि प्रयोग में)। यहाँ पुल्लिंग और स्त्रीलिंग प्रथमा एक वचन रूप दिये गये हैं।
शानच् śānac
क्रिया करते हुए / होते हुए अर्थ में वर्तमान कालिक कृदन्त रूप (आत्मनेपदी धातुओं में कर्तरि प्रयोग में)। यहाँ पुल्लिंग प्रथमा एक वचन रूप दिये गये हैं।
यक् yak
क्रिया करते हुए / होते हुए अर्थ में वर्तमान कालिक कृदन्त रूप (कर्मणि प्रयोग में)। यहाँ पुल्लिंग प्रथमा एक वचन रूप दिये गये हैं।
तव्य tavya
कृत्य प्रत्ययान्त, करना चाहिये अर्थ में कृदन्त रूप (कर्मणि प्रयोग में या विशेषण के रूप में)। यहाँ नपुंसक लिंग प्रथमा एक वचन रूप दिये गये हैं।
क्त kta
कृत् भूतकालिक प्रत्यय, किया हुआ अर्थ में कृदन्त रूप (कर्मणि प्रयोग में या विशेषण के रूप में; केवल अकर्मक और गत्यर्थक धातुओं में यह कर्तृवाच्य में प्रयुक्त होता है)। यहाँ पुल्लिंग प्रथमा एक वचन रूप दिये गये हैं। (क्तवतु प्रत्यय भी भूतकालिक कृत् प्रत्यय है, किन्तु यह कर्तरि में प्रयुक्त होता है; इसे अलग से नहीं दिया गया — क्त रूप से इसे सहजता से बनाया जा सकता है, जैसे गत → गतवान्।)
ण्यत् / यत् ṇyat / yat
कृत्य प्रत्यय, करने योग्य या करना चाहिये अर्थ में कृदन्त रूप (कर्मणि प्रयोग में या विशेषण के रूप में)। यहाँ नपुंसक लिंग प्रथमा एक वचन रूप दिये गये हैं।
घञ् ghañ
पुल्लिंगी भाववाची कृदन्त शब्द। यहाँ पुल्लिंग प्रथमा एक वचन रूप दिये गये हैं।
तुमुन् tumun
करने के लिये अर्थ में अर्धक्रिया अव्यय कृदन्त रूप।
क्तिन् / अ / युच् ktin / a / yuc
स्त्रीलिंगी भाववाची कृदन्त शब्द (स्त्रीलिंग में प्रयुक्त)। यहाँ प्रथमा एक वचन रूप दिये गये हैं।
ल्युट् lyuṭ
नपुंसक लिंगी भाववाची कृदन्त शब्द (नपुंसक लिंग में प्रयुक्त)। यहाँ प्रथमा एक वचन रूप दिये गये हैं।
क्त्वा ktvā
अर्धक्रिया अव्यय रूप — एक क्रिया "करके" अर्थ में।
ल्यप् lyap
अर्धक्रिया अव्यय रूप — एक क्रिया "करके" अर्थ में, जब उपसर्ग के साथ हो।
अच् / क / ण ac / ka / ṇa
धातु से कर्तावाचक संज्ञा। यहाँ पुल्लिंग प्रथमा एक वचन रूप दिये गये हैं।
अनीयर् anīyar
कृत्य प्रत्यय, करना चाहिये अर्थ में कृदन्त रूप (कर्मणि प्रयोग में या विशेषण के रूप में)। यहाँ नपुंसक लिंग प्रथमा एक वचन रूप दिये गये हैं।
ण्वुल् ṇvul
धातु से कर्तावाचक संज्ञा / विशेषण। यहाँ पुल्लिंग और स्त्रीलिंग प्रथमा एक वचन रूप दिये गये हैं।
तृच् tṛc / tṛn
धातु से कर्तावाचक संज्ञा / विशेषण। यहाँ पुल्लिंग और स्त्रीलिंग प्रथमा एक वचन रूप दिये गये हैं।
क्विप् kvip
धातु से कर्तावाचक संज्ञा / विशेषण। यहाँ पुल्लिंग प्रथमा एक वचन, द्विवचन व बहुवचन रूप दिये गये हैं, किन्तु ये रूप पूरी तरह से प्रमाणित नहीं हैं।
खल् khal
धातु से बनी क्रियावाचक प्रथमान्त कर्म संज्ञा के पूर्व जुडकर यह कर्मवाच्य में प्रयुक्त होता है। यहाँ पुल्लिंग प्रथमा एक वचन रूप दिये गये हैं।
णमुल् ṇamul
धातु से बना अर्धक्रिया अव्यय — दो बार प्रयुक्त होने पर बार बार होती क्रिया दर्शाता है, और एक ही बार प्रयुक्त होने पर क्रिया "करके" दर्शाता है।

Other termsअन्य संज्ञाएँ

समूह सदस्य group sibling
किसी धातु के साथ रूपों में पूर्ण या आंशिक समानता दिखाने वाले अन्य धातु।
उपसर्ग upasarga / prefix
ये अव्यय शब्द धातु के पहले लगकर धातु का अर्थ बढ़ाते / घटाते हैं या अर्थ बदल देते हैं। इनकी सूची और सामान्य अर्थ उपसर्ग पृष्ठ पर देखें।
तिङ् प्रत्यय tiṅ pratyaya
ये धातु में लगकर लकारों के रूप बनाते हैं, जिन्हें तिङन्त रूप कहते हैं।
कृत् / कृत्य प्रत्यय kṛt / kṛtya pratyaya
ये धातु में लगकर धातुसाधित कृदन्त रूप बनाते हैं।
सुप् प्रत्यय sup pratyaya
संज्ञा / विशेषण में लगकर उनके विभक्ति प्रत्ययान्त रूप बनाते हैं, जिन्हें सुबन्त रूप कहते हैं।

Definitions supplied by the curator, Rajendra Phadke. Corrections welcome via the Contact page.

Upasargas (verbal prefixes)उपसर्ग

A verb you meet in a verse is often not the bare root the lookup expects. An upasarga (prefix) glues onto the root and changes its surface form, so the form in the verse and the form in the data set may not match letter-for-letter.

Common upasargas and their sensesउपसर्ग एवं उनके सामान्य अर्थ

उपसर्गसामान्य अर्थ (Hindi)उदाहरण
अतिअधिक, बढ़करअतिक्रमः
अधिऊपर, अधिकअधिगमः, अधिक्षेप
अनुबाद में, पीछे, साथ इत्यादिअनुक्रमणम्, अनुग्रहः
अपपृथक्, अलग होनाअपनयनम्, अपहरणम्
अभिओर, समीपअभिमान, अभिभू
अवदूर, नीचे, इत्यादिअवतारः, अवमान
आतक, ओर, चारों ओर, थोड़ा, इत्यादिआक्रन्द
उद् · उत्ऊपरउद्गम, उद्यम
उपसमीप, ओर, पास में, आदिउपकृ
दुस् · दुर्बुरा, दुष्कर कर्म, इत्यादिदुराचारः, दुष्करः
निअन्दर, निश्चय से, बड़ा, विपरीत, इत्यादिनिदेश
निस् · निर्निकलना, दूर हटनानिर्गम, निर्दोषः
परापृथक्, पीछे, विपरीत, इत्यादिपराक्रम, पराजय
परिचारों ओर, समीपपरिगणना
प्रतिओर, पीछे, बदले में, विपरीत, इत्यादिप्रत्युत्तर, प्रतिकार
विविपरीत, पृथक्, विरुद्ध, विषम, विशेष आदिविचल्, विक्री
सम्अच्छा, पूरा, साथ आदिसंगम, संहार
सुअच्छा, पूर्णतया आदि (दुस् के विपरीत अर्थ में आता है)सुशासित

इसके अलावा नञ् समास में संज्ञा या धातुसाधित कृदन्त के पहले नकारार्थ में अ, अन् या न लगता है — जैसे अहितः, असंभाव्यं, अनिच्छन्, अनारुह्य।

Worked examplesसोदाहरण

Strip the upasarga, find the root in the lookup, then re-attach the prefix when you read. A few examples, all drawn from real verses:

  • अभि + एति → अभ्येति  ·  search for एति (or roots इ / ई).
  • वि + ईक्ष् → वीक्ष्, लट् प्र पु ए व वीक्षते  ·  search for वीक्ष, which surfaces ईक्ष् (to see).
  • आ + विष्ट → आविष्ट  ·  search for विष्टः — the क्त-kṛdanta of विष् (to pervade, surround) appears in Group 1.
  • निः + उप + द्रवा → निरुपद्रवा  ·  two upasargas in tandem on the अच्-kṛdanta of द्रु (to melt, liquefy). Search for द्रवः to land on the root.
  • लगुड + आ + हतिम्  ·  लगुड is samāsa-joined with the आ-prefixed क्तिन्-form of हन्; search हतिः.

Rule of thumb: peel off prefixes one at a time, and look for the form the dataset actually carries — usually पुं प्रथमा एकवचन for nominal forms and लट् प्रथम पुरुष एकवचन for verbs.

How to use this lookupइस कोश का प्रयोग कैसे करें

The lookup is built for reading. When you hit an unfamiliar form in a verse, the goal is to reduce it to whatever shape the dataset carries, then read the cell badges and highlights to recover its grammatical identity.

Reading a verse — worked exampleश्लोक पढ़ना — सोदाहरण

यौवनं जरया ग्रस्तमारोग्यं व्याधिभिर्हतम्।
जीवितं मृत्युरभ्येति तृष्णा तु निरुपद्रवा॥

(Youth is devoured by old age, health is hurt by infirmity, life moves toward death — only desire stays untouched.)

  1. Split the sandhi (anvaya). ग्रस्तमारोग्यं → ग्रस्तम् आरोग्यं; व्याधिभिर्हतम् → व्याधिभिः हतम्; मृत्युरभ्येति → मृत्युः अभि + एति.
  2. Strip upasargas. See the Upasarga page — for अभ्येति drop अभि and search एति; for निरुपद्रवा drop निः + उप and search द्रवः.
  3. Reduce kṛdanta forms. ग्रस्तम्, हतम् are नपुं प्रथमा एकवचन of क्त-kṛdantas; the dataset stores the पुं form. Enter ग्रस्तः or हतः instead.
  4. For verbs, search by the लट् प्र पु ए व form — it is shown right under the verb header so you can confirm at a glance.
  5. Read the badges. Each result card lists the cells the form appears in (e.g. kta, karmaṇi). Yellow highlights inside the paradigm mark the exact match; the matching group's title carries a small ★ so you can jump to it.

Anusvāra (ं) and हलन्त (्) are matched flexibly; partial prefixes are also accepted — if a form draws a blank, try a shorter slice.


The reader's full guideसंपूर्ण प्रयोग मार्गदर्शिका

The curator's own tips & tricks for using the app, tab by tab. Open the lookup at sanskritsathi.in on Android or a laptop — nothing to download. The top menu tabs hold the related help; the search window needs a Devanāgarī keyboard, and the on-screen rows above cover visarga, anusvāra and the vocalic ṛ.

इस ऍप को ऍन्ड्रोइड में या लॅपटॉप में sanskritsathi.in लिंक से खोलें। ऍप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है। सब से उपर दिखनेवाली मेन्यू टॅबस् से संबन्धित जानकारियाँ मिलेंगी। मुखपृष्ठ मेन्यू टॅब के सर्च विन्डो में देवनागरी में अक्षर/शब्द प्रविष्ट करें। देवनागरी कीबोर्ड की आवश्यकता होगी; विसर्ग, अनुस्वार और ऋ आदि के लिये नीचे हेल्प उपलब्ध है। डेमो के लिये नीचे कुछ धातु, धातुरूप और कृदन्त रूप शब्द दिये गये हैं — उन्हें क्लिक करने से ऍप का चलन समझने में मदद होगी।

“Verb only” tabकेवल धातु टॅब

After typing, the Verb only tab returns a list of roots: प, पा, पि or पृ each list the roots that begin that way, in Devanāgarī order. A full root name works too; strip any upasarga, and drop a word joined by sandhi at the start or end. अद् or अद both find अद्. The exact match is highlighted on its root; roots where your text appears partially are also listed. Anusvāra is loose — मंड finds मण्ड्, मंच finds मञ्च्. Typing a Sanskrit or English meaning lists every related root.

शब्द प्रविष्टी के बाद केवल धातु टॅब क्लिक करने से धातुओं की सूचि मिलेगी। जैसे प, पा, पि या पृ लिखने से उनसे शुरु होने वाले धातुओं की क्रमवार (देवनागरी) सूचि मिलेगी। पूर्ण धातु नाम लिखने से सही परिणाम तो मिलेगा ही; तथापि उपसर्ग को हटाना जरूरी होगा और पहले/अन्त में कोई शब्द सन्धि से जुडा हुआ है तो उसे हटाना होगा। अद् या अद लिखने से अद् धातु ढूँढ सकते हैं। धातु सूचि में, जहाँ पर लिखे हुए शब्द से सही मिलान है वहाँ root चिन्हित (highlighted) होगा। अन्यत्र जहाँ लिखा हुआ शब्द आंशिक रूप से मौजूद है वे धातु भी सूचि में शामिल होंगे। अनुस्वार शिथिल रूप से उपयोग कर सकते हैं — जैसे मंड से मण्ड् और मंच से मञ्च् मिलेगा। धातु का संस्कृत या अंग्रेजी अर्थ लिखने से सभी सम्बन्धित धातुओं की सूचि मिलेगी।

“Dhātu/kṛdanta form” tabलकार/कृदन्त रूप टॅब

Type a form and hit the form tab to get every dhātu that carries it. On an exact match the relevant tab inside that verb is marked with a ★ and the form is highlighted; a partial match is listed but not highlighted. मंडितः finds मण्डितः, मंचनम् finds मञ्चनम्, and a final anusvāra reads the same as म् (धातव्यं ≡ धातव्यम्). Strip upasargas and sandhi here too.

सर्च विन्डो में धातु रूप लिखकर लकार/कृदन्त रूप टॅब क्लिक करने से जिन धातुओं में यह रूप उपलब्ध है उनकी सूचि निकल आती है। जहाँ शब्द का पूरा मिलान है वहाँ उस धातु के अन्तर्गत सम्बन्धित टॅब ताराचिह्न (★) से चिन्हित होती है और उसमें वह शब्द (लकार रूप या कृदन्त रूप) चिन्हित (highlight) हुआ दिखाई देता है। अपूर्ण मिलान सूचिबद्ध तो होता है लेकिन चिन्हित नहीं होता। यहाँ भी मंडितः से मण्डितः और मंचनम् से मञ्चनम् मिलेगा; साथ ही अन्तिम अनुस्वार और म् एक ही परिणाम देंगे, जैसे धातव्यं और धातव्यम्। इसमें भी उपसर्ग और सन्धि से जुडे शब्द को हटाना जरूरी होगा।

“All” tabसर्व टॅब

For a quick result, the All tab searches root and form together; a Sanskrit or English meaning also lists every related dhātu.

इस टॅब में त्वरित परिणाम के लिये धातु और रूप शब्द साथ ही ढूँढ सकते हैं। इसमें भी धातु का संस्कृत या अंग्रेजी अर्थ लिखने से सभी सम्बन्धित धातुओं की सूचि मिलेगी।

Finding a form — what to keep in mindरूप ढूँढने के लिये ध्यान रखने वाली बातें

If you can recognise the root behind a form and search it under Verb only, that is the easiest path. To use the form tab you must type the form exactly — though a partial can still land it (पठनी finds पठ्'s anīyar form पठनीयम्).

यदि हम धातु/कृदन्त शब्द से मूल धातु पहचान लेते हैं और उसे केवल धातु टॅब से खोजते हैं, तो यह जानकारी ढूँढने का सबसे आसान तरीका होगा। लकार/कृदन्त रूप टॅब में खोजने के लिये धातु रूप/कृदन्त रूप को सर्च विन्डो में हूबहू लिखना पडेगा। हालाँकि अपूर्ण शब्द से भी सही नतीजा मिल सकता है — जैसे पठनी लिखने से भी पठ् धातु का अनीयर् रूप (पठनीयम्) मिलेगा।

Which forms are searchable today. Verb forms are stored in the third person singular (प्रथम पुरुष एक वचन) only, for the lakāras कर्तरि लट्, लङ्, लिट्, लृट्, लोट्, विधिलिङ्, plus कर्मणि लट् and कर्तरि णिजन्त लट्. Searching another person, number, or a different lakāra will not match yet. coming soon all ten lakāras for many roots.

ऍप में धातु के कर्तरि लट्, लङ्, लिट्, लृट्, लोट्, विधिलिङ् और कर्मणि लट् तथा कर्तरि णिजन्त लट् रूप प्रथम पुरुष एक वचन में उपलब्ध हैं। केवल इन्हें सर्च विन्डो में लिखने से ही प्रयुक्त धातु तक पहुँच सकते हैं; सद्य स्थिति में अन्य पुरुष/वचन तथा अन्य लकार रूप लिखने से सही परिणाम नहीं मिलेगा। कई धातुओं के दस लकारों के सारे रूप जल्द ही उपलब्ध कर दिये जायेंगे।

Kṛdanta forms — gender, case & numberकृदन्त रूप — लिंग, विभक्ति एवं वचन

Kṛdantas are stored in one conventional gender and the singular (śānac, yak, kta, ghañ, ac/ka/ṇa, khal in masculine singular; tavya/ṇyat·yat/anīyar in neuter; śatṛ in masc + fem; ṇvul and tṛc in masc + fem). The other genders, cases and numbers follow the usual declensions — e.g. क्त पठितः → पठिता (f.) → पठितम् (n.), declining like राम / माला / फल. The kartari क्तवतु (पठितवान्, declining like भगवत् / नदी / जगत्) is not listed separately — derive it from the क्त stem (गत → गतवान्). The indeclinables तुमुन्, क्त्वा, ल्यप्, णमुल् never change.

संस्कृत पढते समय कई कृदन्त शब्द (कृदन्त अव्यय छोडकर) अक्सर विशेषण रूप में, तीनों लिंगों में और विभिन्न विभक्तियों/वचनों में मिलेंगे, जबकि संग्रह में कृदन्त रूप सामान्य चलन के अनुसार दिये लिंग और एक वचन में हैं। जैसे शानच्, यक्, क्त, घञ्, अच्/क/ण, खल शब्द पुल्लिंग एक वचन में हैं; इनके अन्य लिंगों के रूप (घञ् छोडकर) आसानी से जाने जा सकते हैं — प्रथमा एक वचन में क्त प्रत्ययान्त पठितः से पठिता (स्त्रीलिंग) और पठितम् (नपुंसक) बनते हैं, जो राम / माला / फल के समान चलते हैं। (क्तवतु भी भूतकालिक कृत् प्रत्यय है किन्तु कर्तरि में प्रयुक्त होता है; इसे अलग से नहीं दिया गया — क्त प्रातिपदिक से सहज बनता है, गत → गतवान्; यह भगवत् / नदी / जगत् के समान चलता है।) शतृ शब्द पुल्लिंग व स्त्रीलिंग प्रथमा एक वचन में हैं (पठन् पठन्ती); तव्य, ण्यत्/यत् और अनीयर् नपुंसक लिंग में (धातव्यम्, फल के समान); ल्युट् (पठनम्) नपुंसक; क्तिन् (बुद्धिः, स्तुतिः) मतिः के समान, अ/युच् (ईहा, धारणा) माला के समान; ण्वुल् (पाठकः, पाठिका) राम व माला के समान; तृच् (कर्ता, कर्त्री) कर्तृ व नदी के समान। तुमुन्, क्त्वा, ल्यप् और णमुल् अव्यय हैं और इनमें कोई बदलाव नहीं होता।

coming soon worked declension tables (subanta forms) for these kṛdantas across all three genders and every case — so reaching the stored प्रथमा एक वचन form, and through it the right root, becomes easier.

The verb pageधातु पाठ जानकारी

Each result shows a verb's primary info at the top — gaṇa/pada, seṭ/aniṭ and the English meaning. Click a verb for the full page: the लट् 3rd-singular form with English, Sanskrit and Hindi meanings; Reference forms listing कर्तरि लट्/लङ्/लिट्/लृट्/लोट्/विधिलिङ् + कर्मणि लट् + कर्तरि णिजन्त लट् in order (ubhayapada verbs pair parasmai & ātmane; loṭ — and sometimes liṭ/lṛṭ — often has two forms); a Karmaṇi tab (कर्मणि लट् + लुङ्); Ṇijanta / Sannanta / Yaṅanta tabs (each लट् + लुङ्, 3rd sg); kṛdantas in four groups with śuddha & ṇijanta side by side; and Group siblings at the end — verbs whose forms resemble this one; click to open them. The back button offers Edit term / Re-search; pressing it again exits the app.

धातु सूचि में सबसे उपर प्रत्येक धातु की प्राथमिक जानकारी — गण/पद, सेट्/अनिट् और अंग्रेजी अर्थ — दिखती है। किसी धातु को क्लिक करने से विस्तृत जानकारी मिलती है: सबसे पहले लट् प्रथम पुरुष एक वचन रूप और अंग्रेजी, संस्कृत व हिंदी अर्थ। रेफरेंस फॉर्मस् में कर्तरि लट्, लङ्, लिट्, लृट्, लोट्, विधिलिङ् और कर्मणि लट् तथा कर्तरि णिजन्त लट् प्रथम पुरुष रूप क्रमवार मिलेंगे; उभयपदी धातु में परस्मै व आत्मने रूप साथ-साथ; कर्तरि परस्मै लोट् के अक्सर दो रूप (कभी लिट्/लृट् में भी)। कर्मणि टॅब में कर्मणि लट् व लुङ् रूप; इसी तरह णिजन्त, सन्नन्त व यङन्त टॅब में लट् व लुङ् प्रथम पुरुष एक वचन रूप। कृदन्त चार गटों में बँटे हैं, जिनमें शुद्ध व णिजन्त रूप साथ-साथ हैं। आखिर में ग्रुप सिबलिंगज् में वे धातुएँ मिलेंगी जिनके रूप मिलते-जुलते हैं; उन्हें क्लिक करने से उस धातु की जानकारी मिलेगी। किसी भी समय बॅक बटन से Edit term, Re-search के विकल्प मिलते हैं; बॅक बटन दुबारा करने से ऍप से बाहर आ सकते हैं।

Guide text supplied by the curator, Rajendra Phadke (help.docx). Items marked coming soon are planned, not yet live.

Sources & creditsस्रोत एवं आभार

This lookup rests on a hand-built dataset and a small set of open tools. Everything used to build and run the site is listed here.

Datasetधातुरूप संग्रह

The dhātu data — 2,064 roots with their lakāra forms, kṛdantas, karmaṇi, ṇijanta, sannanta, and yaṅanta cells, plus meanings in Sanskrit, English, and Hindi — was compiled by hand over several years by Rajendra Phadke. It is the primary source behind every result you see. The data is roughly 80% filled and grows with each revision; the क्विप् (kvip) kṛdanta cells are provisional, pending an authoritative source. Released under CC BY-SA 4.0.

Primary referencesमुख्य संदर्भ

In building the dataset, the curator drew on the following reference works:

  • बृहद्धातुरूपावलिः टी आर कृष्णाचार्य विरचित October 1924 Bhaaskara press Trivandrum (pdf from online source)
  • वाक्यरचना बोध युवाचार्य महाप्रज्ञ विरचित, मुनि श्रीचन्द्र कमल तथा मुनि विमलकुमार सम्पादित February 1990 जैन विश्व भारति प्रेस, लाडनूं ३४१३०६ (pdf from online source)
  • The practical Sanskrit-English Dictionary by Vaman Shivaram Apte, Parimal Publications Delhi – 110007, Second reprint edition 2022.
  • संस्कृत मराठी शब्द कोश, लेखक संपादक कै. जनार्दन विनायक ओक, वरदा बुक्स Pune, seventh edition 2020
  • Sanskrit Hindi English dictionary, by Suryakant, published by Orient Longman New Delhi 1975 (pdf from online source)
  • धातुरूपकौमुदी - केशवरावाचार्यसूनुना राजेश्वरशास्त्रिमुसलगाँवकरेण सम्पादिता, चौखम्भा संस्कृत संस्थान, वाराणसी 2009 (pdf from online source)
  • सुलभ धातुरूप कोश (भाग १,२,३) कृष्णाजी भास्कर वीरकर कृत श्री जिनशासन आराधना ट्रस्ट मुम्बई (pdf from online source)
  • Krdantarupamala by Pandit S. Ramasubba Sastri (श. रामसुब्रह्मण्यशास्त्रि) (भाग १ से ५) published by the Sanskrit Education Society, shri Bharati Vijayam Press, Madras 1965 (published with the Aid of Govt. of India, Ministry of Education.
  • On line reference source : https://sanskritabhyas.in/
  • सुलभ संस्कृत व्याकरण, लेखक आनन्दस्वरूप शास्त्री, प्रकाशक मोतीलाल बनारसीदास बनारस प्रथम संस्करण १९५२ (pdf from online source)
  • काले हायर संस्कृत ग्रामर (धातुकोश सहित), लेखक मोरेश्वर रामचन्द्र काले, अनुवादक कपिलदेव द्विवेदी आचार्य, प्रकाशक रामनारायणलाल बेनीप्रसाद – इलाहाबाद १९६४ (pdf from online source)
  • लघु सिद्धान्त कौमुदी भैमीव्याख्या (भाग १,२) , लेखक भीमसेन शास्त्री, भैमी प्रकाशन दिल्ली ११०००६ द्वितीय संस्करण १९९२ (pdf from online source)
  • नवीन अनुवाद् चन्द्रिका – प्रणेता श्रीचक्रधरशर्मा शास्त्री, प्रकाशक श्री जगदीशचन्द्र नौटियाल, नौटियाल पुस्तक भण्डार लखनौ १९५४ (pdf from online source)
  • संस्कृत भाषाप्रदीप (भाग १,२,३) लेखक सखाराम रावजी भट, मैकमिलन आणि कम्पनी, मुम्बई १९३६ (pdf from online source)
  • लघुसिद्धान्तकौमुदी वरदराज लिखित Nirnaya Sagar Press Bombay (pdf from online source)
  • संस्कृत व्याकरण प्रवेशिका लेखक बाबुराम सक्सेना, प्रयाग, द्वादश संस्करण शके २०२९ (pdf from online source)
  • On line reference source : https://hi.wiktionary.org/wiki/ विक्षनरी:संस्कृत–हिंदी_शब्दकोश – एक मुक्त शब्दकोष
  • First Book of Sanskrit by Ramkrishna Gopal Bhandarkar, Govt. Central Book Depot. Eighth edition 1883 (pdf from online source)
  • Second Book of Sanskrit by Ramkrishna Gopal Bhandarkar, 11th edition printed at Tattva vivechaka press Mumbai 1908 (pdf from online source)

Bibliography compiled by Rajendra Phadke; editions and citations as supplied by the curator.

Grammatical frameworkव्याकरणिक ढाँचा

Forms are organised by traditional Pāṇinian vyākaraṇa categories — the lakāras (tenses and moods) and the kṛdanta pratyayas (śatṛ, kta, tavya, ghañ, tumun, ktvā, and the rest). The tool stores attested forms; it does not derive them from sūtras. Suffix glosses follow the curator's own phrasing — see the Glossary.

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